Tuesday, 23 August 2011

उदघोषित तकल्लुफ

एक हाहाकारी अधम
    पद चाप सुनाई पड़ता  है ,
    लेकिन बिल्कुल मौन,बिल्कुल चुपचाप 
               ठीक  उसी तरह  जैसे आप.

 सवेरे की चिड़ियों 
                     की चहचाहट,
 सुनाती है किसी 
               के आने की आहट
जो कभी शिकारी थे ,
                  वो आज भी शिकारी है
    लेकिन बिल्कुल मौन, बिल्कुल चुपचाप
                         रूप बदल गया है इनका,
  पहले बेरुखे ईमान वाले
                         बाण चलाते थे,
  आज जुबान चलाते
                      फिर भी हम
     बिल्कुल निशब्द बिल्कुल चुपचाप
                  जो भूखे नंगे थे
                               वो भूखे नंगे है 
  अनाज के दाने इनसे
               भी मिलने को  तकल्लुफ करते
क्योंकि इनको डर था
             इसलिए ये रहते थे
    बिल्कुल मौन बिल्कुल चुपचाप
             रक्त स्त्राव बदन से
    होता था,
 थोडा गम था गुलामी का 
                  आज आजादी का है डर,
हर कोई निर्बाध 
             हर कोई निडर 
 और जंगलों की जड़े 
               सूखती ,रोती और
 बिलख रही है,
देती रहती हैं अपने 
             इन हत्त्यारों को अभिशाप 
    थोडा मौन थोडा चुपचाप,
   अरुणिमा धरती पर आने से
  डरती है सहमी है
                       फिर भी अनुशासित है,
   लेकिन बिल्कुल मौन
                             बिल्कुल चुप चाप||
                        










          

Saturday, 13 August 2011

जन जनपथ के

ये छोटे-छोटे, नन्हे नन्हे बच्चे बेघर हैं. 
कुछ अजनबी से, कुछ पहचाने से
मगर भाग जाते हैं दूर, 
जरा पास आने से 
बदन के अन्दर मानो सूखा सा पड़ गया, 
अपराधों की बाढ़ आ गयी,
इनके पीछे हाथ हैं उनके,
जो कहते हम हैं 
जन जनपथ के !!

अब इनके हाथ में कलम नहीं 
हथियार हैं,
ये अनपढ़ हैं ये गंवार हैं,
माताएं इनकी रोती हैं.
कुछ  विधवाएं भी हैं
जो कहीं सोती पड़ी
जगाने पर शब्द
निकल पड़ते उनके,
कहीं वो तो नहीं
जो हैं 
जन जनपथ के !!


भ्रष्टाचार की आंधी
सब को उड़ाना चाहती है
अपने में,
क्योंकि कुछ अबोध हैं 
कुछ मजबूर हैं !
रास्ता भटक गए हैं,
शायद वे 
निशब्द है मुख उनके,
क्योंकि कुछ प्रभाव है 
उनका,
जो हैं
जन जनपथ के !!

पौधे सूख गए
लगाने से पहले,
हवा भी अब नहीं चलती
शायद कुछ
डर बैठ गया है
मन में उनके,
कि कहीं 
मैं भी न बिक जाऊं
बन न जाऊं मुद्दे उनके
क्योंकि ये हैं
जन जनपथ के !!