एक हाहाकारी अधम
पद चाप सुनाई पड़ता है ,
लेकिन बिल्कुल मौन,बिल्कुल चुपचाप
ठीक उसी तरह जैसे आप.
सवेरे की चिड़ियों
की चहचाहट,
सुनाती है किसी
के आने की आहट
जो कभी शिकारी थे ,
वो आज भी शिकारी है
लेकिन बिल्कुल मौन, बिल्कुल चुपचाप
रूप बदल गया है इनका,
पहले बेरुखे ईमान वाले
बाण चलाते थे,
आज जुबान चलाते
फिर भी हम
बिल्कुल निशब्द बिल्कुल चुपचाप
जो भूखे नंगे थे
वो भूखे नंगे है
अनाज के दाने इनसे
भी मिलने को तकल्लुफ करते
क्योंकि इनको डर था
इसलिए ये रहते थे
बिल्कुल मौन बिल्कुल चुपचाप
रक्त स्त्राव बदन से
होता था,
थोडा गम था गुलामी का
आज आजादी का है डर,
हर कोई निर्बाध
हर कोई निडर
और जंगलों की जड़े
सूखती ,रोती और
बिलख रही है,
देती रहती हैं अपने
इन हत्त्यारों को अभिशाप
थोडा मौन थोडा चुपचाप,
अरुणिमा धरती पर आने से
डरती है सहमी है
फिर भी अनुशासित है,
लेकिन बिल्कुल मौन
बिल्कुल चुप चाप||
