Tuesday, 27 September 2011

मदन से सौंतुख कश्मीर और उसकी कन्थापीर

लड़ो मत कश्मीर के लिए 
                    यह तो एक है भू खंड
फिर तुम क्यों कर
                     रहे इसे तंग |
न हिंदुस्तान -न पाकिस्तान
                       इसकी अपनी भी
है कोई पहचान ,
                        क्यों कर रहे आक्रांत 
लगा कृसानु
                       यह किरीट भारत का ,
मत करो इसे नग्न|
                          तुम जाकर जहाँ 
हो जाते मग्न||
                             फिर क्यों कर रहे 
          इसे तंग |||

ये स्वर्ग है धरती का 
                    ऐसा कभी कहा गया ,
तुम बना रहे नरक कुन्ड|
                            न कुछ कर पाती,
          निदाध इसका, 
स्वेत झिन्गूला
                     पहने हुए बुला रही 
मदन को सौंतुख ,
                     मत छीनो इसका 
     कोई सुख||
                     यह भी है,
इस धरती का अंग |
                  फिर क्यों कर ,
रहे इसे तंग ||

                    सुन लो एक बार
इसकी कंथा,
                कोई व्यथा तो नहीं इसे 
आखिर बाद तुम्हारे 
                 ये होगी किसे |
मकरंद आमंद फैला ,
                          चारों ओर,
ये कभी न करती नेवारे ,
                          देख कर हर कोई 
हो जाता इसे दंग|
                        फिर क्यों कर ,
रहे इसे तंग ||

1 comment:

  1. कश्मीर जो एक भू खंड है इस के लिए तरह-2 की लड़ाईयां लड़ी जा रही है. कितनी उचित उन्नति हो रही देश में, देश की परंपरा का निर्वहन अपनी-2 बहादुरी को प्रदर्शित करके किया जा रहा है. देश का बुद्धजीवी वर्ग अपनी बुद्धिमत्ता को साबित करने में लगा है. शुक्रिया ऐसे महापुरषों को और मेरा शत-शत नमन.

    ReplyDelete

www.bokonindia.com