नारी अब तेरी बारी ,
दूर हो रही धीरे-धीरे
तेरी सारी अज़ादारी |
तु नेमत , तु पहचान
इबादत की ,
मन में तेरे नाच रहे ,
वन के सारे केकी |
तु जीवन की पियूष स्रोत
तुझसे जीवन ओत प्रोत |
तु यामिनी-तु विस्मयकारी
नारी अब तेरी बारी |
हैं रहे पसर पाँव धरा पे ,
कल तक भरी था पुरुष समाज ,
अब तु भारी इनपे |
खेत-खलिहानों में हो जाना
या घूंघट में रह जाना ,
खेल संगणको के संग हो ,
या सीमा पे जान गवाना |
भाग रहे अब धीरे-धीरे ,
सब निश्चारी- सब व्यभिचारी |
नारी अब तेरी बारी ||
करने विस्फारित अंतर्मन को,
कालकूट सी पड़ी टूट ,
करने सभी संकुचित को
नहीं मुमानियत,अब यहाँ कोई ,
हो रहे संचालित जो कहे तु ही
तु देवी अदब-बदस्तूर की ,
तु बैरी जहाँ के नासूर की |
तभी होती इबादत तेरे
तासीर की |
तु है सब पे वारी -वारी
नारी अब तेरी बारी |
नारी अब तेरी बारी ||
दूर हो रही धीरे-धीरे
तेरी सारी अज़ादारी |
तु नेमत , तु पहचान
इबादत की ,
मन में तेरे नाच रहे ,
वन के सारे केकी |
तु जीवन की पियूष स्रोत
तुझसे जीवन ओत प्रोत |
तु यामिनी-तु विस्मयकारी
नारी अब तेरी बारी |
हैं रहे पसर पाँव धरा पे ,
कल तक भरी था पुरुष समाज ,
अब तु भारी इनपे |
खेत-खलिहानों में हो जाना
या घूंघट में रह जाना ,
खेल संगणको के संग हो ,
या सीमा पे जान गवाना |
भाग रहे अब धीरे-धीरे ,
सब निश्चारी- सब व्यभिचारी |
नारी अब तेरी बारी ||
करने विस्फारित अंतर्मन को,
कालकूट सी पड़ी टूट ,
करने सभी संकुचित को
नहीं मुमानियत,अब यहाँ कोई ,
हो रहे संचालित जो कहे तु ही
तु देवी अदब-बदस्तूर की ,
तु बैरी जहाँ के नासूर की |
तभी होती इबादत तेरे
तासीर की |
तु है सब पे वारी -वारी
नारी अब तेरी बारी |
नारी अब तेरी बारी ||
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