जिंदगी को जाम के प्याले में
छलकते पैमाने के तरह देखा है
उफ़ हुस्न-ए-दीवान-ए-आलम
मोहब्बत इस कदर कुर्बान होते देखा है
कहता हूँ संभल जाओ
ये हुस्न की महफ़िल सजाने वालोँ
वरना कह दूंगा आज ये
के तूफ़ान दरिया में पिघलते देखा है ||
छलकते पैमाने के तरह देखा है
उफ़ हुस्न-ए-दीवान-ए-आलम
मोहब्बत इस कदर कुर्बान होते देखा है
कहता हूँ संभल जाओ
ये हुस्न की महफ़िल सजाने वालोँ
वरना कह दूंगा आज ये
के तूफ़ान दरिया में पिघलते देखा है ||
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