बारिश की बूँदें
जो कभी-कभी
मेरे चिल्लाते -उफनाते
मन को
देने तसल्ली आ जाती
मैं उड़ेल पड़ता उनको
जो कसक
मन में बन पाती ।
वो कुछ कहती
वो कुछ सुनती
वो सच्चा साथी बन कर
भर लेता आह मेरा उर
उन्हें डोर में बुनकर
वो जब थकती
वो तब रूकती
अपना गीत सुनकर मुझको
गीत मेरा ले जाती ।
मेरे चिल्लाते -उफनाते मन को
देने तसल्ली आ जाती ॥
जो कभी-कभी
मेरे चिल्लाते -उफनाते
मन को
देने तसल्ली आ जाती
मैं उड़ेल पड़ता उनको
जो कसक
मन में बन पाती ।
वो कुछ कहती
वो कुछ सुनती
वो सच्चा साथी बन कर
भर लेता आह मेरा उर
उन्हें डोर में बुनकर
वो जब थकती
वो तब रूकती
अपना गीत सुनकर मुझको
गीत मेरा ले जाती ।
मेरे चिल्लाते -उफनाते मन को
देने तसल्ली आ जाती ॥
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