जब था विदेशी राज,
होता था अत्याचार,
अब है स्वदेशी राज,
क्या फिक्र थी उन्हें ?
क्या फिक्र है इन्हें ?
दोनों जीवन से,
करते रहे व्यभिचार,
जब बढे गाँधी के कदम,
किया गया उन्हें नमन |
अब बढे कदम अन्ना,
तो सरकार उन्हें करे मना||2|
नेता देश में बड़े खास हैं,
क्योंकि मुद्दे इनके पास है |
ये होते तभी फेल,
जब जनता से करे खेल |
ये मीडिया के सहारे हैं,
फिर भी ये बिचारे हैं |
सदा करे जनता शिकार,
लगे बड़े होशियार ||3|
देश की जनता गयी जाग,
तभी इनमे लगी आग |
सबकी अपनी है मजबूरी,
और बढ़ रही बीच की दूरी |
अन्ना की ये आवाज,
देश को कर रही आगाज |
अभी जीत आधी,
कल बात होगी पूरी ||4|
जीत अपनी पूरी होगी
दूर कभी मजबूरी होगी
आला अफसर रौब दिखाते
और हमें हैं दूर भागते!
पेशकार पैसा खूब खाते,
तभी फाइल अन्दर भिजवाते ||5|
तू क्यों नाच रहा रे बन्दर,
जब साहब अभी नहीं हैं अन्दर
कहीं से आया उनका फ़ोन,
होगा आज रात में खून,
नेता जी जब जाएँ जेल,
तभी तो होगा आगे खेल,
हैं बढे कदम जेल की और,
फिर क्यों होए इतना शोर ||6|
लेकिन हमारे साथ हैं,
अब इनको चल गया पता,
बच्चे ही बच्चों के बाप हैं ||7|


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