नहीं एक ,दो और तीजी मै,
मै तो पूरा भण्डारण हूँ |
मै सरिता की अंगड़ाई का ,
कभी किसी तन्हाई का ,
नहीं किसी के रति क्रीडा का ,
बल्कि एक अंकुरित हूँ |
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
ऋतुओं की कल्पन का ,
एक उदित विश्वास,
लिए खड़ा है है और ,
कोई मेरा भी आश |
माती की कंकड़ी फ़ैल ,
कर रही मुझे बहुत बकौल,
मै किसी का अपनयन हूँ|
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
बहा रही हाथों की ,
गरिमा का प्रबल स्रोत|
गुणधर्म मातियों का ,
कर रहा मुझे ओत प्रोत |
दिनकर की किरणों का ,
रूपांतरण हूँ |
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
समीर की सिहरन का अंश ,
कीट पतिंगों की थिरकन ,
का दन्त |
मै तो मन्हारण हूँ |
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
मै तो पूरा भण्डारण हूँ |
मै सरिता की अंगड़ाई का ,
कभी किसी तन्हाई का ,
नहीं किसी के रति क्रीडा का ,
बल्कि एक अंकुरित हूँ |
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
ऋतुओं की कल्पन का ,
एक उदित विश्वास,
लिए खड़ा है है और ,
कोई मेरा भी आश |
माती की कंकड़ी फ़ैल ,
कर रही मुझे बहुत बकौल,
मै किसी का अपनयन हूँ|
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
बहा रही हाथों की ,
गरिमा का प्रबल स्रोत|
गुणधर्म मातियों का ,
कर रहा मुझे ओत प्रोत |
दिनकर की किरणों का ,
रूपांतरण हूँ |
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
समीर की सिहरन का अंश ,
कीट पतिंगों की थिरकन ,
का दन्त |
मै तो मन्हारण हूँ |
मै तो पूरा भण्डारण हूँ ||
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