अरुणिमा की लोहीपन,
अट को व्याकुल,
खुल जाता किवाड़,
आकुल|
उठ कर मैं,
थोडा उन्मन,
शुरू कर देता अध्यापन|
प्रभात भी फेरी,
लगा रहा,
हो गई दूर,
निस्तब्धता निशा की,
लिए निशा का संबल|
अरुणिमा का लोहीपन
अट को व्याकुल||
संग यामिनी के,
थिरकन,
मैं भी करता रहा कीर,
कभी कन्थापीर|
निशा सौंतुख लगी पगी,
और लहरें उदधि की,
बेचैन कर रही,
कर रही अकुल|
अरुणिमा की लोहीपन,
अट को व्याकुल ||
अट को व्याकुल,
खुल जाता किवाड़,
आकुल|
उठ कर मैं,
थोडा उन्मन,
शुरू कर देता अध्यापन|
प्रभात भी फेरी,
लगा रहा,
हो गई दूर,
निस्तब्धता निशा की,
गात गतिशील हो गया ,
मैं करता रहा काम सकील,लिए निशा का संबल|
अरुणिमा का लोहीपन
अट को व्याकुल||
संग यामिनी के,
थिरकन,
मैं भी करता रहा कीर,
कभी कन्थापीर|
निशा सौंतुख लगी पगी,
और लहरें उदधि की,
बेचैन कर रही,
कर रही अकुल|
अरुणिमा की लोहीपन,
अट को व्याकुल ||

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